श्रीधर वेम्बु का कड़ा विरोध
ज़ोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में फ्रेशवर्क्स द्वारा 660 कर्मचारियों की छंटनी के निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। फ्रेशवर्क्स, जो कि ज़ोहो के साथ सॉफ़्टवेयर ऐज़ ए सर्विस (SaaS) क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करती है, ने अपनी कार्यप्रणाली को सरल बनाने के प्रयास में यह छंटनी की है। वेम्बु ने इस कदम को 'नंगा लालच' करार देते हुए आलोचना की और यह पूछा कि कैसे एक कंपनी, जिसके पास $1 बिलियन नकदी है और जो 20% की विकास दर के साथ नकद लाभ कमा रही है, वह कर्मचारियों को निकालने का निर्णय ले सकती है जबकि वह $400 मिलियन का स्टॉक बायबैक की योजना बना रही है।
अमेरिकी कॉर्पोरेट संस्कृति पर सवाल
वेम्बु ने यह भी इंगित किया कि इस तरह की क्रियाएँ अमेरिकी कॉर्पोरेट दुनिया में आम हैं, और अब इसे भारत में भी लागू किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के बीच व्यापक निंदकता उत्पन्न होती है। वेम्बु जोर देते हैं कि ज़ोहो ग्राहक और कर्मचारियों को शेयरधारकों पर प्राथमिकता देता है, जो कि इसे एक निजी कंपनी बनाए रखने का मुख्य कारण है।
फ्रेशवर्क्स नेतृत्व को चुनौती
उन्होंने फ्रेशवर्क्स के नेतृत्व को यह सोचने की चुनौती भी दी कि क्या वे $400 मिलियन का उपयोग एक नए व्यापारिक क्षेत्र में निवेश का दृष्टिकोण और कल्पना नहीं कर सकते, जिससे उन कर्मचारियों को काम पर रखा जा सके जिन्हें वे अब नहीं चाहते। वेम्बु ने इस पर सवाल उठाया कि क्या फ्रेशवर्क्स के पास जिज्ञासा, दृष्टि और सहानुभूति की कमी है।
भारतीय कर्मचारी प्रभावित
इस छंटनी का असर भारत में लगभग 400 कर्मचारियों पर पड़ेगा, जहां फ्रेशवर्क्स के अधिकतर कर्मचारी स्थित हैं। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि फ्रेशवर्क्स के स्टॉक की कीमत नास्डैक पर $16.82 पर बंद हुई, जो छंटनी के घोषणा के बाद 28.50% तक बढ़ गई।
भारतीय उद्योग में एक नयी चेतना
श्रीधर वेम्बु का यह कदम भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में एक नयी चेतना का आगाज़ करता है, जहाँ परंपरागत कॉर्पोरेट आदतों को चुनौती देते हुए एक मानवीय दृष्टिकोण को अपनाने की बात कही जा रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय उद्योग जगत इस आलोचना पर कैसे प्रतिक्रिया देता है और क्या यह किसी बड़े बदलाव का संकेत है।
टिप्पणि (17)
Subashnaveen Balakrishnan
ये सब तो बस एक बड़ी कंपनी का नकदी भंडार बढ़ाने का तरीका है। कर्मचारी को निकालकर शेयरधारकों को खुश करना आजकल बिज़नेस का नियम बन गया है। कोई सोचता नहीं कि इन लोगों के पास बच्चे हैं, घर हैं, बिल हैं।
Keshav Kothari
फ्रेशवर्क्स का स्टॉक ऊपर गया तो ये बात सब ठीक है। बाजार तो लाभ देखता है ना इंसानियत नहीं।
Rajesh Dadaluch
ये लोग बस नंगे लालच में उतर गए हैं।
Pratyush Kumar
वेम्बु की बात सही है। ज़ोहो ने हमेशा कर्मचारियों को पहले रखा है। भारत में भी ऐसी कंपनियां होनी चाहिए। बस एक बार इस तरह की बात सुनकर लगता है कि अभी भी कुछ अच्छा बाकी है।
nishath fathima
यह अनैतिक है। कर्मचारियों को बेकार करना एक अपराध है। यह बात सभी को समझनी चाहिए।
DHEER KOTHARI
वेम्बु बहुत अच्छे हैं। 🙌 ऐसे लोगों के बारे में सुनकर लगता है कि भारतीय बिज़नेस में अभी भी दिल है।
vineet kumar
ये सवाल बहुत गहरा है। क्या एक कंपनी का मकसद सिर्फ नकदी बढ़ाना है? या इंसानों को जीवन देना? जब तक हम इस सवाल का जवाब नहीं ढूंढेंगे, तब तक ये छंटनियां बंद नहीं होंगी।
Deeksha Shetty
फ्रेशवर्क्स के नेतृत्व के पास दृष्टि नहीं है बस बैंक बैलेंस देख रहे हैं। इन्हें तो नौकरी से निकाल देना चाहिए।
Ratna El Faza
मुझे लगता है अगर कंपनी इतनी अच्छी है तो इस तरह का फैसला नहीं लेना चाहिए। ये लोग बस आसान रास्ता चुन रहे हैं।
Nihal Dutt
ये सब एक बड़ा षड्यंत्र है। शेयरधारकों को खुश करने के लिए ये छंटनी है। अगला कदम भारत में सभी टेक कंपनियों का बंद होना होगा।
Swapnil Shirali
फ्रेशवर्क्स के नेतृत्व के पास इतनी नकदी है, लेकिन इन्हें लगता है कि कर्मचारियों की जिंदगी एक बजट आइटम है? अरे भाई, ये लोग तो एक स्टॉक चार्ट पर जी रहे हैं, इंसानों पर नहीं।
Upendra Gavale
क्या अगर ये लोग अपने पैसे से एक नया शिक्षा प्रोग्राम शुरू कर दें तो नहीं होगा? ये बच्चे जो नौकरी खो रहे हैं, उन्हें स्किल्स दे दें। ये तो बेहतर निवेश होगा।
abhimanyu khan
वेम्बु का बयान बहुत भावुक है। लेकिन व्यावहारिक दृष्टि से, फ्रेशवर्क्स का यह निर्णय बिज़नेस के नियमों के अनुकूल है। जो कंपनी अपने बजट को नियंत्रित नहीं कर सकती, वह बाजार में नहीं बच सकती।
Jay Sailor
अमेरिकी कॉर्पोरेट्स ने भारत को अपना बाजार बना लिया है। अब ये भारतीयों को निकालकर अपना लाभ बढ़ा रहे हैं। ये नए आक्रमण हैं। हमारे देश के नेता इसके खिलाफ कुछ करें तो अच्छा होगा।
Anindita Tripathy
वेम्बु के बयान ने मुझे उम्मीद दी। ये बात बहुत कम लोग कहते हैं। अगर और भी कंपनियां इस रास्ते पर आ जाएं तो भारत में काम करना फिर से इंसानी बन जाएगा।
Ronak Samantray
ये सब फेक है। फ्रेशवर्क्स का स्टॉक ऊपर गया तो ये छंटनी असल में बड़े लोगों के लिए एक ट्रिक है। अगला चरण ये होगा कि भारत में सभी कर्मचारियों को AI बना दिया जाएगा।
Anil Tarnal
ये जो छंटनी हुई है, इसमें से 80% लोग ज़ोहो में जा चुके हैं। वेम्बु ने इसे जानकर भी बयान दिया। ये तो बस एक बड़ा ड्रामा है।