IMD ने दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार में ठंडी लहर और कोहरे की चेतावनी जारी की

IMD ने दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार में ठंडी लहर और कोहरे की चेतावनी जारी की

दिल्ली की सुबह की हवा में एक ऐसी सिहरन दौड़ गई जैसे कोई बर्फ का तूफान आ गया हो। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 10 से 28 नवंबर 2025 तक उत्तर भारत के लिए ठंडी लहर और घना कोहरे की चेतावनी जारी की है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-10°C तक गिर गया, जो सामान्य से 1.3°C से 3.3°C नीचे है। लोग गर्म कपड़े पहनकर बाहर निकल रहे हैं, बस स्टॉप्स पर भीड़ जमा हो रही है, और अस्पतालों में सांस संबंधी मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ये सिर्फ मौसम का खेल नहीं—ये जीवन के साथ खेल रहा है।

ठंडी लहर का समयचक्र: नवंबर की शुरुआत से अंत तक

नवंबर की शुरुआत में ही भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लिए ठंडी लहर की चेतावनी जारी की। 10-12 नवंबर के बीच, दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-10°C रहा, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में तो गंभीर ठंडी लहर दर्ज की गई। इसके बाद 15-17 नवंबर को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ठंडी लहर बनी रही, और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान -5°C तक गिर गया। ये निरंतर गिरावट नए नहीं—लेकिन इस बार इतनी लंबी और घनी थी।

कोहरे और तापमान का खेल: दिल्ली से हिसार तक

22 से 26 नवंबर के बीच, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घना कोहरा फैल गया। सुबह 6 बजे तक दृश्यता 50 मीटर तक गिर गई। दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 300 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं। अगले दिन, 23-24 नवंबर को, हिसार में न्यूनतम तापमान 5.7°C रहा—ये भारत के मैदानी क्षेत्रों में इस सीजन का सबसे कम तापमान था। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-10°C रहा, जबकि अधिकतम तापमान 23-25°C के बीच रहा, जो सामान्य से 1.7°C तक कम था। बिहार के दक्षिणी हिस्सों में भी तापमान 9-11°C तक गिर गया।

क्यों ये ठंड इतनी लंबी और तीव्र है?

विशेषज्ञों के अनुसार, ये ठंडी लहर उत्तरी पश्चिमी एशिया से आ रही शीतल वायु प्रवाह की वजह से है। वायुमंडलीय दबाव के एक विशेष पैटर्न ने ठंडी हवाओं को दक्षिण की ओर धकेल दिया। इसके साथ ही उत्तरी हिमालय के पास बर्फ के पिघलने का असर भी देखा गया—जिससे समुद्री वायु का प्रवाह कम हुआ। इसके अलावा, अगले दो दिनों में उत्तर-पश्चिमी भारत में तापमान 2-3°C बढ़ने का अनुमान था, लेकिन फिर वहीं से फिर से 2-3°C गिर गया। ये उतार-चढ़ाव लोगों के लिए बहुत खतरनाक है। बुजुर्गों को तो बीमारी का डर है, और बच्चों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

राज्यों की प्रतिक्रिया: क्या हुआ तैयारी?

दिल्ली सरकार ने अस्पतालों में तापमान नियंत्रण वाले वार्ड तैयार किए। बिहार सरकार ने अनाथालयों और बुजुर्ग आश्रमों में गर्मी के लिए बिजली और कूलर के बदले हीटर लगाए। उत्तर प्रदेश ने राज्य भर में निःशुल्क गर्म भोजन वितरण शुरू किया। लेकिन अभी भी कई गांवों में बिजली की आपूर्ति अनियमित है। एक गांव के निवासी ने कहा, “हमारे घर में गैस नहीं है, कोयला नहीं है। हम बस एक बाल्टी में गर्म पानी भरकर रात बिताते हैं।” ये वाक्य सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, पूरे उत्तर भारत के गरीबों का है।

क्या ये अब नियम बन गया है?

2023 में भी दिल्ली में नवंबर के अंत तक तापमान 7°C तक गिरा था। 2022 में भी एक ही तरह की ठंडी लहर आई थी। लेकिन इस बार तापमान का गिरावट और अधिक लगातार रहा। जलवायु विशेषज्ञ का कहना है कि “हिमालय के पार के बर्फ के पिघलने और उत्तरी अटलांटिक के तापमान में बदलाव ने ये पैटर्न बदल दिया है।” अब ये सिर्फ एक सीजन की बात नहीं—ये नए जलवायु वास्तविकता का हिस्सा हो रहा है।

अगले कदम: क्या अब भी खतरा बना हुआ है?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 27 नवंबर के बाद भी हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में कोहरा और ठंडी लहर के संभावित अवसर हैं। दिल्ली में अगले 48 घंटों में तापमान 10-12°C तक रहने की संभावना है। राज्य सरकारों को अब एक लंबी रणनीति बनानी होगी—सिर्फ अस्पतालों का नहीं, बल्कि गरीबों के लिए गर्म आश्रय, बिजली की आपूर्ति और आपातकालीन राहत व्यवस्था का। वरना अगले साल भी यही कहानी दोहराई जाएगी।

बुनियादी तथ्य: ठंडी लहर का आंकड़ा

  • दिल्ली में न्यूनतम तापमान: 8-10°C (सामान्य से -1.3°C से -3.3°C कम)
  • हिसार (हरियाणा) में न्यूनतम तापमान: 5.7°C — भारत के मैदानी क्षेत्रों में सबसे कम
  • कोहरे की अवधि: 22-26 नवंबर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में घना
  • तापमान में उतार-चढ़ाव: 2-3°C की वृद्धि, फिर 2-3°C की कमी
  • ठंडी लहर की अवधि: 10-28 नवंबर 2025 (19 दिनों तक)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ठंडी लहर के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं?

हां, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों, निमोनिया और ब्रोंकाइटिस के मामले 40% तक बढ़ गए हैं। बुजुर्गों और बच्चों में ये संक्रमण ज्यादा फैल रहे हैं। एक दिल्ली स्थित अस्पताल में पिछले सप्ताह 1,200 से अधिक मरीज आए, जबकि सामान्य समय में यह संख्या 800 थी।

क्या ये ठंडी लहर जलवायु परिवर्तन का हिस्सा है?

हां, विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय के पार के बर्फ के पिघलने और उत्तरी अटलांटिक के तापमान में असामान्य विचलन ने शीतल वायु प्रवाह को दक्षिण की ओर धकेल दिया है। ये घटनाएं पिछले तीन सालों में बार-बार दोहराई जा रही हैं—जो एक नए जलवायु पैटर्न का संकेत है।

गरीबों के लिए इस ठंड से कैसे बचा जा सकता है?

सरकारों ने गर्म भोजन और आश्रय देने की योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन उनकी पहुंच अभी सीमित है। गांवों में बिजली न होने पर लोग जलाने के लिए लकड़ी या कोयला इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे हवा का प्रदूषण बढ़ रहा है। एक स्थायी समाधान गर्मी के लिए सस्ते और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है।

क्या हवाई यातायात पर इसका असर हुआ?

हां, दिल्ली, लखनऊ और आगरा के हवाई अड्डों पर 300 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं। कोहरे के कारण दृश्यता 50 मीटर तक गिर गई। यात्री घंटों तक हवाई अड्डे पर फंसे रहे। यह अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा झटका है।

क्या अगले साल भी ऐसा ही होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जलवायु परिवर्तन का यही रुझान बना रहा, तो अगले साल भी नवंबर के अंत तक ठंडी लहर आने की संभावना है। अब ये एक सामान्य घटना बन रही है, न कि असामान्य। इसके लिए लंबी अवधि की योजनाबद्ध तैयारी जरूरी है।

IMD क्या सलाह दे रहा है?

IMD ने लोगों को गर्म कपड़े पहनने, बाहर निकलने से पहले तापमान चेक करने और बुजुर्गों और बच्चों को ठंड से बचाने की सलाह दी है। विशेष रूप से अस्पतालों और आश्रमों में गर्मी के लिए व्यवस्था करने का आह्वान किया है।

टिप्पणि (8)

  1. lakshmi shyam
    lakshmi shyam
    30 नव॰, 2025 AT 15:33 अपराह्न

    ये सब तो बस चल रहा है न? सरकारें बस ट्वीट करती हैं और फिर भूल जाती हैं। गरीबों की जिंदगी का क्या होगा? ये ठंड तो अब जीवन और मौत का सवाल बन गई है।

  2. Sabir Malik
    Sabir Malik
    30 नव॰, 2025 AT 22:54 अपराह्न

    मुझे लगता है कि इस ठंड का सिर्फ मौसम या जलवायु परिवर्तन ही कारण नहीं है-ये तो एक बड़ी त्रासदी है जिसे हमने बनाया है। हमने लंबे समय तक प्रदूषण को नज़रअंदाज़ किया, ऊर्जा की नीतियों को अनदेखा किया, और अब ये नतीजा निकल रहा है। बुजुर्ग और बच्चे जो बीच में फंस गए हैं, उनके लिए एक अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि एक स्थायी सिस्टम चाहिए-जिसमें सस्ती, स्वच्छ गर्मी, बिजली की नियमित आपूर्ति, और आश्रयों का नेटवर्क हो। ये सब तकनीकी नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का सवाल है।

  3. Debsmita Santra
    Debsmita Santra
    2 दिस॰, 2025 AT 22:04 अपराह्न

    देखो ये ठंडी लहर का असर सिर्फ तापमान पर नहीं पड़ रहा बल्कि वायु गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है जिससे PM2.5 लेवल बढ़ रहा है और इसका सीधा संबंध रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन्स से है जिसके कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है और ये एक साइकिल है जिसका एक चक्र दूसरे चक्र को बढ़ा रहा है और अगर हम इसे अभी नहीं रोकेंगे तो अगले साल तो ये और खराब हो जाएगा

  4. Vasudha Kamra
    Vasudha Kamra
    3 दिस॰, 2025 AT 13:37 अपराह्न

    इस ठंड के दौरान गरीबों के लिए निःशुल्क गर्म भोजन और आश्रय योजनाएं बहुत अच्छी शुरू की गई हैं, लेकिन इनकी लागू होने की दक्षता और पहुंच की जांच की जानी चाहिए। बिजली की आपूर्ति के लिए डिस्ट्रिक्ट-लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम बनाना जरूरी है। ये सिर्फ तत्काल उपाय नहीं, बल्कि एक जलवायु न्याय का मुद्दा है।

  5. Abhinav Rawat
    Abhinav Rawat
    5 दिस॰, 2025 AT 10:11 पूर्वाह्न

    क्या तुमने कभी सोचा है कि ये ठंड तो बस एक चेतावनी है? एक चेतावनी जो हमारे अहंकार के खिलाफ बोल रही है-हमने अपनी जमीन को बेच दिया, हवा को जहर दिया, और अब जब ठंड आती है, तो हम इसे मौसम का दोष देते हैं। लेकिन ये तो हमारे लिए बनाया गया एक दर्पण है। हमारे जीवन शैली, हमारे उपभोग, हमारे निर्णय-ये सब इस ठंड में दिख रहे हैं। और अगर हम इस दर्पण को नहीं देखेंगे, तो अगली बार ये ठंड हमें बर्फ में दफना देगी।

  6. Shashi Singh
    Shashi Singh
    6 दिस॰, 2025 AT 01:45 पूर्वाह्न

    ये सब जलवायु परिवर्तन नहीं है... ये एक गुप्त अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र है!!! क्या तुम्हें पता है कि अमेरिका और चीन ने एक साथ हिमालय के बर्फ पिघलाने के लिए सैटेलाइट लॉन्च किए हैं??? ये ठंड तो वो अपने राष्ट्रीय हितों के लिए बनाई गई है!!! और भारत की सरकार इसे छिपा रही है!!! आप लोग जागो!!! अगर तुम बाहर निकले तो तुम्हारी आत्मा ठंड में जम जाएगी!!! 🔥❄️💣

  7. Surbhi Kanda
    Surbhi Kanda
    6 दिस॰, 2025 AT 20:57 अपराह्न

    IMD की चेतावनी तो बहुत स्पष्ट है, लेकिन राज्यों की प्रतिक्रिया अभी भी अप्रत्याशित है। गर्म भोजन और आश्रय तो अच्छा है, लेकिन ये तो ट्रीटमेंट है, न कि प्रीवेंशन। इसके लिए एक नियमित जलवायु तैयारी योजना बनानी होगी जिसमें ग्रामीण बिजली डिस्ट्रीब्यूशन, ऊर्जा दक्षता, और स्वच्छ ऊर्जा एक्सेस को शामिल किया जाए। ये एक राष्ट्रीय आपातकालीन योजना की तरह होनी चाहिए।

  8. Sandhiya Ravi
    Sandhiya Ravi
    8 दिस॰, 2025 AT 03:30 पूर्वाह्न

    मैं एक छोटे से गांव से हूं और हमारे यहां भी यही हो रहा है... बहुत लोग लकड़ी जला रहे हैं और धुएं से आंखें जल रही हैं... मैं बस चाहती हूं कि कोई इसके बारे में सोचे और इन लोगों के लिए कुछ करे... बस एक छोटा सा हीटर या एक गर्म कम्बल भी बहुत मदद कर सकता है

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